इंदौर क्राइम ब्रांच में शिकायत, पीड़ित ने कहा- किप्ट्रो और आॅनलाइन ट्रेनिंग में लाभ का दिया झांसा
ब्रह्मास्त्र इंदौर
इंदौर में एक निवेश कंपनी के खिलाफ 17 लाख 66 हजार से ज्यादा की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पीड़ित ने कंपनी के कर्ताधतार्ओं के खिलाफ शिकायत की है।
जिसकी जांच क्राइम ब्रांच के डीसीपी करवा रहे हैं। डीसीपी के रीडर ने पीड़ित को नोटिस जारी कर बयान भी लिए लेकिन मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है।
डीसीपी राजेश त्रिपाठी के यहां बेगुसराय निवासी अंगेश कुमार ने शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ इन्फिनिक्स इन्फोटेक कंपनी के संचालक मनीष पांडे ओर कर्मचारी अंकित तिवारी ने धोखाधड़ी की है। अंगेश ने बताया कि पहले अंकित तिवारी से मुलाकात हुई थी। उसने बताया था कि कंपनी प्रोजेक्ट इंवेस्टमेंट का काम करती है। वह बडे़ प्रोजेक्टों में शामिल होती है। कंपनी एल्गोरिदम सॉफ्टवेयर प्रोवाइड करती है।
जिसमें आॅटोमैटिक ट्रेडिंग की बात की। इसमें प्रॉफिट एक साल में करीब 1 करोड़ के लगभग हो जाएगा। अंगेश ने बताया कि मैंने अंकित की बातों में आकर अलग-अलग हिस्सों में 17 लाख 66 हजार रुपए इन्वेस्ट कर दिए।
अंकेश ने अपनी शिकायत में बताया कि मेरी सबसे पहले अप्रैल 2024 में अंकित से मुलाकात हुई थी। तब अंकित ने अपनी कंपनी का नाम स्पेयर टेक्नोलॉजी बताया था। उसने 2 मोबाइल नंबरों से बार-बार संपर्क करते हुए किप्ट्रो और आॅनलाइन ट्रेनिंग में लाभ देने की बात कही थी।
ट्रेडिंग का डेमो दिखाने के बाद उन्होंने 17 हजार रुपए से इसकी शुरूआत कराई। इसमें 9 प्रतिशत से अधिक लाभ देने की बात हुई।
10.50 लाख के बाद और रुपए मांगे- अंकेश ने बताया कि अंकित की बातों में आकर पहले 10 लाख 50 हजार रुपए जमा कराए। इसके बाद कहा गया कि उनका नाम होल्ड में चला गया है। जिसमें और अमाउंट जमा कराने की बात कही। इंकार करने पर अंकित ने भरोसा दिलाया कि कंपनी ओपन हो चुकी है। जिसका आॅफिस रेसकोर्स रोड पर है। इसके बाद इसमें ओर पैसे डलवा दिए। अंगेश ने बताया वे मोबाइल से बातचीत नहीं कर रहे थे। अक्टूबर माह में इंदौर आया तो कंपनी के आॅफिस में बैठाकर मुझे धमकाया गया। मैंने पुलिस कमिश्नर आॅफिस पर शिकायत की तो कंपनी के कर्मचारी प्रियंका और संदीप ने धमकाया। वहीं कंपनी की तरफ से कोर्ट के नोटिस भेजकर धमकाया। इस मामले में क्राइम ब्रांच में शिकायत होने के बाद डीसीपी राजेश त्रिपाठी के रीडर अनिल पुरोहित ने अंगेश को बुलाकर उसके बयान भी लिए थे लेकिन आरोपियों पर कार्रवाई नहीं की गई। बता दें, फर्जी एडवाइजरी मामले में पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह पहले ही सीधे तौर पर एफआईआर के आदेश दे चुके हैं। फिर भी अन्नपूर्णा, राजेंद्र नगर, कनाड़िया, पलासिया, तिलकनगर, खजराना, विजयनगर और हीरानगर इलाके में बिना सेबी से रजिस्टर्ड कई एडवाइजरी कंपनी संचालित हो रही हैं।